उत्तराखंड में कचरा फैलाने और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कसेगा शिकंजा! ठोस-प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनेगी नई कार्ययोजना

Oct 23, 2026 - 18:30
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उत्तराखंड में कचरा फैलाने और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कसेगा शिकंजा! ठोस-प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनेगी नई कार्ययोजना

उत्तराखंड डेस्क: उत्तराखंड में ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को नए नियमों के अनुपालन के लिए व्यापक और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत शहरी, अर्धशहरी क्षेत्रों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिक मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों, निजी संस्थानों और औद्योगिक संगठनों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की जाएंगी।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति (शहरी विभाग) की बैठक आयोजित हुई। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 में हुए संशोधनों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और स्वच्छ उत्तराखंड मिशन 2026-2030 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

शहरों से पर्यटन स्थलों तक लागू होगा अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का प्रभावी अनुपालन केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अर्धशहरी इलाकों और अधिक पर्यटकों की आवाजाही वाले ग्रामीण पर्यटन स्थलों पर भी ठोस एवं प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन की व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने संबंधित शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों और अन्य क्रियान्वयन संस्थाओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट करते हुए एक बेहतर और अनुकरणीय मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य ऐसा व्यावहारिक ढांचा तैयार करना है, जिसे पूरे प्रदेश में प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

नए नियमों में निगरानी, प्रवर्तन और चालान पर जोर

बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत प्रवर्तन, निगरानी और चालान से संबंधित प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

नए प्रावधानों में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility-EPR) को भी प्रमुखता दी गई है। इसके अलावा संबंधित पोर्टल पर तकनीकी माध्यमों से कार्रवाई का विवरण अपलोड करने, लैंडफिल तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा न्यूनतम करने, अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

अधिक मात्रा में अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है, ताकि निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

निकायों और ग्राम पंचायतों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शहरी निकायों, ग्राम पंचायतों और अन्य संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जाएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें धरातल पर लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

कचरे के पृथक्करण से लेकर पुनर्चक्रण तक मजबूत होगी व्यवस्था

बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न स्थानों पर संचालित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

इसके साथ ही शैक्षणिक और कौशल विकास संस्थानों में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। जन-जागरूकता अभियान और पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया।

कैबिनेट के अनुमोदन के लिए पेश होगी कार्ययोजना

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्ययोजना और नियमावली में सभी आवश्यक प्रावधानों को शामिल किया जाए। इसके बाद इसे मंत्रिमंडल के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाए।

इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना है। बैठक में सचिव नितेश झा, रणवीर सिंह चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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