डायरिया के प्रति जागरूकता में बड़ी भूमिका निभाएंगे दवा विक्रेता
अभिमुखीकरण कार्यशाला में केमिस्ट एसोसिएशन का फैसला
पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से कार्यशाला आयोजित
गोंडा : मेडिकल स्टोर पर आने वाले डायरिया पीड़ितों या उनके परिजनों को दवा विक्रेता डायरिया की शीघ्र पहचान, बचाव और ऐसे में ओआरएस व जिंक की महत्ता के बारे में बताने के साथ ही स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाने का परामर्श भी देंगे। दवा विक्रेताओं और केमिस्ट एसोसिएशन की सोमवार को स्थानीय एक होटल में आयोजित अभिमुखीकरण कार्यशाला में यह फैसला लिया गया कि डायरिया के प्रति जागरूकता में वह हरसम्भव मदद करेंगे। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से जनपद में चलाये जा रहे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता केमिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राकेश सिंह ने की।
इस मौके पर श्री सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में हरसम्भव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि समुदाय में डायरिया को लेकर आज भी बहुत सी भ्रांतियां व्याप्त हैं, जिनको दूर करना बहुत जरूरी है, इस दिशा में एसोसिएशन मदद करेगा। उन्होंने कहा कि डायरिया की शुरुआत में ही पहचान कर ओआरएस का घोल दिया जाए तो गंभीर स्थिति तक पहुँचने से बच्चे को बचाया जा सकता है। 24 घंटे में यदि तीन बार पतली दस्त आ रही है तो यह डायरिया के लक्षण हो सकते हैं और यह लम्बे समय तक बनी रहे तो यह गंभीर डायरिया का रूप ले सकती है। निजी क्षेत्र में अब लिक्विड के रूप में भी निर्मित ओआरएस का घोल उपलब्ध है। उन्होंने रोटा वायरस वैक्सीन के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यशाला में पीएसआई इंडिया के पंकज पाठक ने ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के 13 और बिहार के तीन जनपदों में चलाया जा रहा है, जिसमें शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है। डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए, इसमें केमिस्ट बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इस मौके पर केमिस्ट नितिन गोयल के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि दस्त के दौरान भी स्तनपान जारी रखना चाहिए क्योंकि मां का दूध बच्चे को पोषण और ताकत देता है।

डायरिया से बचने के लिए हाथों की सही तरीके से स्वच्छता भी बहुत जरूरी है। शौच तथा बच्चों का मल साफ़ करने के बाद, भोजन बनाने व खाने और बच्चों को खिलाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन-पानी से धोना जरूरी है। शुद्ध पेयजल का ही इस्तेमाल करें। घर का बना ताजा और पौष्टिक भोजन का ही सेवन करें। खुले में शौच करने से बचें और बच्चों के मल का सही तरीके से निस्तारण करें। घर और आस-पास साफ़-सफाई रखें। कार्यशाला के अन्त में केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में केमिस्ट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष नवनीत सिंघल, सतनाम प्रजापति तथा करीब 40 दवा व्यापारी उपस्थित रहे।
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