सिख-पंजाबी समाज को साधने की BJP की बड़ी कवायद, नितिन नवीन और धामी ने गिनाए सरकार के फैसले

Sep 12, 2026 - 00:30
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सिख-पंजाबी समाज को साधने की BJP की बड़ी कवायद, नितिन नवीन और धामी ने गिनाए सरकार के फैसले

रुद्रपुर: भाजपा ने सिख-पंजाबी समाज के बीच भरोसा मजबूत करने की कोशिश की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रपुर में आयोजित सिख-पंजाबी गौरव सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकार के उन फैसलों का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने समाज के सम्मान, आस्था और हितों से जुड़ा बताया। दोनों नेताओं ने अपने संबोधन में सिख समाज के योगदान और विकास कार्यों को प्रमुखता से रखा।

सिख समाज के सम्मान से जुड़े फैसलों का किया जिक्र

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सम्मेलन में करतारपुर कॉरिडोर खोलने, 1947 के विभाजन पीड़ितों की स्मृति में विभाजन विभीषिका स्मृति स्थल बनाने जैसे फैसलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिख समाज की भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

उन्होंने साहिबजादों के बलिदान की याद में वीर बाल दिवस घोषित किए जाने का भी जिक्र किया। साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए भाजपा सरकारों की ओर से किए गए प्रयासों को भी सामने रखा।

हेमकुंड साहिब रोपवे सहित विकास कार्यों पर धामी ने रखी बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में सिख आस्था के प्रमुख केंद्र हेमकुंड साहिब से जुड़े विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे का निर्माण जल्द पूरा होने वाला है।

भाजपा नेताओं ने सम्मेलन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि केंद्र और राज्य सरकार सिख समाज की आस्था, सम्मान और हितों को लेकर गंभीर हैं। दोनों नेताओं ने समाज के साथ सरकार के जुड़ाव को भी रेखांकित किया।

किसान आंदोलन के बाद बदले समीकरणों पर भाजपा की नजर

तराई क्षेत्र की राजनीति में सिख-पंजाबी समाज और किसान वर्ग की अहम भूमिका रही है। ऐसे में इस सम्मेलन को भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ चले किसान आंदोलन के दौरान ऊधम सिंह नगर में किसानों की सक्रियता काफी अधिक रही थी।

आंदोलन के बाद तराई क्षेत्र में सिख-पंजाबी किसान वर्ग के एक हिस्से की भाजपा से दूरी की चर्चा सामने आती रही। इसी वजह से आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपने पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में जुटी मानी जा रही है।

आस्था और किसान दोनों मुद्दों पर भाजपा का फोकस

रुद्रपुर में आयोजित सम्मेलन में भाजपा नेतृत्व ने किसान आंदोलन से जुड़ी नाराजगी पर सीधे चर्चा करने के बजाय सिख समाज की आस्था और सम्मान से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी।

करतारपुर कॉरिडोर, वीर बाल दिवस और हेमकुंड साहिब रोपवे जैसे विषयों के जरिए पार्टी ने समाज के साथ भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया।

तराई क्षेत्र में सिख-पंजाबी समाज का बड़ा वर्ग खेती और कारोबार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री का एक साथ मंच साझा कर समाज को संबोधित करना केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले भरोसा कायम करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

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