UP चुनाव से पहले AAP का बड़ा फैसला, 349 सीटों पर लड़ने की गलती नहीं दोहराएगी केजरीवाल की पार्टी
नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। पार्टी अब पिछली बार की तरह प्रदेश की सैकड़ों सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बजाय चुनिंदा क्षेत्रों में मजबूती से चुनाव लड़ने पर ध्यान देगी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्वीकार किया कि पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 349 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे। उन्होंने कहा कि इस बार पार्टी उन्हीं सीटों पर अपनी ताकत लगाएगी, जहां जीत की बेहतर संभावना होगी।
पिछले चुनाव में 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भी पिछली चुनावी रणनीति की समीक्षा करते हुए कम सीटों पर अधिक प्रभावी ढंग से लड़ने का फैसला किया है।
पीटीआई से बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पिछली बार करीब साढ़े तीन सौ सीटों पर चुनाव लड़ने का परिणाम पार्टी के पक्ष में अच्छा नहीं रहा। उन्हें एक प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कुछ सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों को 25 से 26 हजार और कुछ जगहों पर करीब 10 हजार वोट मिले थे।
इस बार चुनिंदा सीटों पर ताकत लगाएगी AAP
संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि इस बार पार्टी केवल चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी, बल्कि उन क्षेत्रों पर ध्यान देगी जहां संगठन मजबूत है और जीत की संभावना बन सकती है। हालांकि, उन्होंने अभी यह नहीं बताया कि आम आदमी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
पार्टी का मानना है कि सीमित सीटों पर संसाधनों और संगठनात्मक ताकत का बेहतर इस्तेमाल करके चुनावी प्रदर्शन सुधारा जा सकता है। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन और सीटों के निर्धारण में स्थानीय पकड़ तथा पिछले चुनावों के प्रदर्शन को अहमियत मिल सकती है।
नगर निकाय चुनावों के प्रदर्शन से AAP को उम्मीद
संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को बेहतर बताते हुए कहा कि इन चुनावों में आम आदमी पार्टी के कई सभासद और पार्षद जीते थे। उनके मुताबिक, पार्टी के करीब 250 से 300 सभासद-पार्षद और लगभग 10 चेयरमैन निर्वाचित हुए थे।
उन्होंने रामपुर, केमरी नगर पंचायत और बरसाना जैसे स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पार्टी के उम्मीदवारों को सफलता मिली। संजय सिंह के अनुसार, नगर निकाय चुनावों के बाद भी उत्तर प्रदेश में पार्टी की सक्रियता बनी रही है। पार्टी अब इसी संगठनात्मक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
सपा के साथ गठबंधन पर भी रहेगी नजर
पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना तलाशने की कोशिश की थी। हालांकि, सपा और कांग्रेस के साथ आने के बाद AAP ने अकेले चुनाव लड़ने का रास्ता चुना था और करीब 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
इस बार भी उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन पर नजर रहेगी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल की स्थिति AAP की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। पंजाब, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में कांग्रेस के साथ राजनीतिक मुकाबला होने के कारण गठबंधन को लेकर पार्टी के सामने अलग तरह की चुनौतियां भी हैं।
फिलहाल AAP ने उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने वाली सीटों की संख्या और संभावित गठबंधन को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की है। संजय सिंह के बयान से इतना स्पष्ट है कि पार्टी इस बार व्यापक स्तर पर उम्मीदवार उतारने के बजाय चुनिंदा सीटों पर अपनी चुनावी ताकत केंद्रित करना चाहती है।
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