यूपी में स्वास्थ्य विभाग पर बड़ी कार्रवाई! 28 डॉक्टर 15 से ज्यादा अस्पतालों से जुड़े मिले, सत्यापन में खुलासा

May 16, 2026 - 00:30
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यूपी में स्वास्थ्य विभाग पर बड़ी कार्रवाई! 28 डॉक्टर 15 से ज्यादा अस्पतालों से जुड़े मिले, सत्यापन में खुलासा

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े अस्पतालों में चलाए गए विशेष सत्यापन अभियान में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि 28 डॉक्टर ऐसे थे जिनके नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे, जबकि 274 चिकित्सक ऐसे भी मिले जिनके नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे। तीन दिन चले इस सत्यापन अभियान के बाद सभी संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में तकनीकी त्रुटियों और डाटा अपडेट न होने की स्थिति भी सामने आई है, जिसमें डॉक्टरों के पुराने संस्थानों से नाम हटे नहीं थे।

स्वास्थ्य विभाग में सख्त कार्रवाई का दौर जारी

प्रदेश सरकार पहले से ही स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। इससे पहले पांच डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है और कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के कार्यालय के अनुसार लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और चिकित्सा कार्य से दूर रहने के आरोप में इन चिकित्सकों को सेवा से हटाया गया।

पांच डॉक्टरों की सेवा समाप्त, नाम भी सामने आए

सेवा से हटाए गए डॉक्टरों में गोरखपुर जिला अस्पताल की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉ. रामजी भारद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं।

अंबेडकरनगर में भी अनियमितताओं पर कार्रवाई

अंबेडकरनगर में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं की जांच में भी कई अधिकारियों पर गाज गिरी है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा समेत 16 चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में पद के दुरुपयोग, सरकारी मानकों के उल्लंघन और निजी हितों के लिए फाइलों को मंजूरी देने जैसे आरोपों की पुष्टि हुई है। यह जांच एक अपर जिलाधिकारी सहित तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई थी।

वेतन वृद्धि पर भी रोक, कई डॉक्टरों पर कार्रवाई

सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत कई चिकित्सकों की वेतनवृद्धि पर भी रोक लगाई है। हमीरपुर में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई हैं। उन पर मरीजों से वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप हैं। इसके अलावा बलरामपुर के डॉ. संतोष सिंह की चार और झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं।

प्रदेश सरकार का साफ संदेश है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।


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