BRICS में PM मोदी के 10 बड़े प्रस्ताव, UNSC सुधार पर दो टूक; बोले- ‘ग्लोबल साउथ’ को रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बनाना होगा

Sep 13, 2026 - 09:30
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BRICS में PM मोदी के 10 बड़े प्रस्ताव, UNSC सुधार पर दो टूक; बोले- ‘ग्लोबल साउथ’ को रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बनाना होगा

नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित BRICS समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव और BRICS को अगले 20 वर्षों के लिए नई दिशा देने पर जोर दिया। विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए मानवता प्रथम है और आपसी सहयोग उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने BRICS के सामने 10 प्रस्ताव रखे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को अब और टालने से इनकार किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल की BRICS समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव है, क्योंकि समूह अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए दौर की शुरुआत मानी जाती है और BRICS भी अब परिपक्वता के चरण में पहुंच चुका है।

पिछले दो दशकों में BRICS ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। पीएम मोदी ने कहा कि सदस्य देश एक-दूसरे के नजरिए का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि BRICS किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करता है। अब समय आ गया है कि BRICS के भीतर की एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए।

अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि BRICS को अगले 20 वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य वाला नया एजेंडा तैयार करना चाहिए। इसकी शुरुआत समूह के आंतरिक कामकाज में सुधार से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संस्थागत कामकाज की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव दिया कि BRICS में निरंतरता और फैसलों को लागू करने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाए। ‘ट्रोइका’ व्यवस्था के जरिए सभी पहलों और उनके परिणामों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। इसके लिए हर फैसले से जुड़े नोडल बिंदु, समय-सीमा और उसके क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज करने वाली सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का भी सुझाव दिया।

‘विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा’

पीएम मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि मौजूदा ढांचा पिरामिड जैसा है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति ऊपर केंद्रित है। दूसरी ओर, निचले स्तर पर ऐसे देश हैं जो इन फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका सीमित रहती है।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने में सबसे आगे है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पीछे है। ऐसे में ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने की जरूरत है, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए और हर सदस्य की भागीदारी सुनिश्चित हो।

पीएम मोदी ने कहा कि इसके लिए BRICS देशों को वैश्विक शासन में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने चाहिए, ताकि अगली समिट तक इन्हें BRICS सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सके।

BRICS में PM मोदी के 10 प्रस्ताव

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और नहीं टाला जा सकता।
  2. टैक्स आधारित बातचीत को निश्चित समय-सीमा से जोड़ना होगा।
  3. वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाले देशों को निर्णय लेने में उचित अधिकार मिलना चाहिए।
  4. सामूहिक प्रतिक्रिया, गति, कौशल और प्रभाव पर जोर देना होगा।
  5. वैश्विक संस्थानों में मानवता का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रभावी समाधान जरूरी हैं।
  6. नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाया जा सकता है।
  7. संकट की सूचना, चिकित्सा सहायता, परिवारों को जानकारी और सुरक्षित निकासी में मदद की व्यवस्था होनी चाहिए।
  8. ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
  9. AI और साइबरस्पेस में भविष्य के अवसरों के साथ-साथ नियम भी तय किए जाने चाहिए।
  10. ग्लोबल साउथ को रूल टेकर से रूल शेपर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

UNSC सुधार को अब और टालने के खिलाफ PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रोडमैप को तैयार करने के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने जैसे तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना होगा। प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मुद्दे पर बातचीत को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकता के अनुरूप होनी चाहिए। जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को आगे बढ़ा रहे हैं, उन्हें वैश्विक आर्थिक शासन व्यवस्था को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।

नाविकों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव

पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री नाविक वैश्विक व्यापार में बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन मुश्किल समय में उन्हें अक्सर जरूरी सहायता नहीं मिल पाती। उन्होंने BRICS के माध्यम से ‘नाविकों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बनाने का सुझाव दिया।

यह नेटवर्क संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों को आपस में जोड़ सकता है। इससे संकट के समय अलर्ट जारी करने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, परिवारों को सूचना देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी में मदद मिल सकेगी।

AI, साइबरस्पेस और तकनीक में ‘रूल शेपर’ बने ग्लोबल साउथ

प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य के वैश्विक नियम तय करने में समान भागीदारी बेहद जरूरी है। AI, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र न केवल भविष्य के अवसरों को आकार दे रहे हैं, बल्कि आने वाले समय के नियम भी तय कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को नियमों का पालन करने वाले पक्ष से नियम बनाने वाले पक्ष में बदलने की कोशिश होनी चाहिए। BRICS के माध्यम से ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत के कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता से लैस किया जा सकता है।

‘आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक’

पीएम मोदी ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि इसी दिन ‘United Nations Day for South-South Cooperation’ भी है। ऐसे में ग्लोबल साउथ के लिए लिया गया यह फैसला विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत इस प्रयास में नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन का संदेश स्पष्ट होना चाहिए कि अगर भविष्य साझा है, तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने ‘आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक’ को BRICS@20 का संकल्प बताया।

इससे पहले BRICS बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि BRICS, G7 से आगे निकल चुका है और पश्चिमी देश कमजोर पड़ रहे हैं।

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