उरई में अनूठी ‘श्री बुद्ध वीथिका’ का भव्य शुभारंभ : श्रीमती संध्या पुरवार व हरी मोहन पुरवार के दुर्लभ संग्रह को सभी ने सराहा
उरई (उत्तर प्रदेश)- भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के अवसर पर शहर में एक अनूठी ‘श्री बुद्ध वीथिका’ का आयोजन किया गया। यह विशेष प्रदर्शनी इन्टैक उरई अध्याय, कानपुर-बुंदेलखंड प्रांतीय कला धरोहर समिति, संस्कार भारती एवं भारत विकास परिषद (स्वामी विवेकानंद शाखा, उरई) के संयुक्त तत्वावधान में चूड़ी वाली गली स्थित श्रीमती संध्या पुरवार के आवास पर आयोजित हुई।
कार्यक्रम का उद्घाटन झांसी से आईं एमएलसी श्रीमती रमा निरंजन और मुंबई के पूर्व एक्साइज कमिश्नर शंभू दयाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और शंखनाद के साथ किया। इस दौरान रमा निरंजन ने भारतीय परंपरा में नारी की सशक्त भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश में नारी शक्ति सदैव प्रभावशाली रही है। वहीं शंभू दयाल ने कहा कि इस तरह की वीथिकाएं समाज को बुद्ध के विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और विश्व के कई देशों, विशेषकर थाईलैंड में, इनके अनुयायियों का सौम्य व्यवहार प्रेरणादायक है।
वीथिका में भारत सहित इंडोनेशिया, जापान, लाओस, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, चीन, भूटान और श्रीलंका के आकर्षक डाक टिकटों का प्रदर्शन किया गया। इनमें भूटान की टंका पेंटिंग से सुसज्जित सिल्क स्टाम्प विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा लगभग 2200 वर्ष पुराने कुशाण और गुप्तकालीन ताम्र सिक्कों के साथ कई देशों की मुद्राएं भी प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी की सबसे खास वस्तु बोधिवृक्ष की एक पत्ती रही, जिसे भारत सरकार द्वारा श्रीलंका के राष्ट्रपति को भेंट किया गया था। साथ ही बोधिवृक्ष से जुड़े दुर्लभ डाक टिकट और टेंपल टोकन भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बने।
वीथिका में पुखराज, ब्लैक जेड, पन्ना और पिंक जेड जैसे रत्नों से बनी बुद्ध प्रतिमाएं, विभिन्न देशों की यात्राओं के चित्र, और करीब 90 वर्ष पुरानी हस्तनिर्मित पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई, जिसमें बुद्ध अपने प्रथम पांच शिष्यों को उपदेश देते हुए दिखाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त ‘लाफिंग बुद्धा’ की विभिन्न मूर्तियां और सिक्के भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे। आयोजकों के अनुसार कुछ विद्वान लाफिंग बुद्धा को धन के देवता कुबेर का रूप मानते हैं। कंबोडिया और म्यांमार के बुद्ध चित्रयुक्त बैंक नोट भी यहां प्रदर्शित किए गए।
प्रदर्शित सामग्री श्रीमती संध्या पुरवार और डॉ. हरीमोहन पुरवार के निजी संग्रह से प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया और भारत विकास परिषद के अध्यक्ष किशोरी शरण शांडिल्य ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
वीथिका अवलोकन में कुमारी काजल राजपूत, प्रदीप कुमार पाट कार ,नवनीत श्रीवास्तव, सूर्य नायक श्रीमती प्रियन्का अग्रवाल, श्रीमती मन्जू विजय रावत,श्रीमती रेखा रावत, श्रीमती प्रीती गुप्ता, श्रीमती प्रीती बन्सल, राम बली सिंह, डा0 राकेश गुप्ता, शिवशंकर रावत, महिपाल सिंह ,रवीन्द्र तिवारी, प्रवीण गुप्ता आदि का विशेष योगदान रहा ।अंत में विवेकानन्द शाखा के अध्यक्ष किशोरी शरण शांडिल्य ने सभी आगन्तुको का आभार व्यक्त किया।
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