उत्तराखंड के लोक भवन में गूंजी आत्मनिर्भरता की गूंज : हर्षल फाउंडेशन की पहल को राज्यपाल गुरुमीत सिंह ने सराहा
*लोक भवन में ‘इंटरैक्शन विद स्ट्रॉन्ग सोल्स’ कार्यक्रम आयोजित, दिव्यांगों और जरूरतमंदों को प्रोत्साहन
*टीबी से स्वस्थ हुई दो महिलाओं को सिलाई मशीनें भेंट, 84 दिव्यांग एवं अनाथ बच्चों को दिए गए स्पोर्ट्स शूज
देहरादून। समाज के जरूरतमंद वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके भीतर आत्मविश्वास जगाने के उद्देश्य से लोक भवन में ‘इंटरैक्शन विद स्ट्रॉन्ग सोल्स’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में टीबी से उबर चुके मरीजों, दिव्यांगजनों और अनाथ बच्चों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने हर्षल फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए संस्था के प्रयासों को प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की क्षमताओं को पहचानने, उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। आयोजन में दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा और उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
हर्षल फाउंडेशन लंबे समय से दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। संस्था ने दिव्यांग व्यक्तियों को कृत्रिम हाथ-पैर और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने से अपनी सेवाओं की शुरुआत की थी। समय के साथ संस्था ने अपने कार्यों का विस्तार करते हुए दिव्यांगजनों को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी प्रयास शुरू किए हैं।
फाउंडेशन का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को केवल सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए आवश्यक अवसर और संसाधन प्रदान करना भी है। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में संस्था के इन्हीं प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने फाउंडेशन के कार्यों का अवलोकन किया और सामाजिक उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। संस्था के लिए यह अवसर गौरवपूर्ण रहा कि उसे अपने कार्यों और उपलब्धियों को राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। टीबी से स्वस्थ हुई दो महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने में सहायता देने के उद्देश्य से सिलाई मशीनें प्रदान की गईं।इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को अपनी आजीविका अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे सिलाई के कार्य के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से उबरने के बाद महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की यह पहल उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में उपयोगी कदम है।
कार्यक्रम के दौरान 84 दिव्यांग और अनाथ बच्चों को स्पोर्ट्स शूज वितरित किए गए। इस पहल के माध्यम से बच्चों को प्रोत्साहित करने और उनकी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया गया।आयोजन में दिव्यांग बच्चों की रचनात्मकता और कौशल को सामने लाने के लिए उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के नौ स्टॉल भी लगाए गए। इन स्टॉलों पर बच्चों की मेहनत और हुनर की झलक देखने को मिली। राज्यपाल ने स्टॉलों का अवलोकन किया और बच्चों के बनाए उत्पादों की सराहना की।
बच्चों की प्रतिभा को मिला प्रोत्साहन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष रहा। ऐसे मंच दिव्यांग बच्चों को अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।‘इंटरैक्शन विद स्ट्रॉन्ग सोल्स’ कार्यक्रम ने दिव्यांगजनों, अनाथ बच्चों और टीबी से स्वस्थ हुए लोगों के सशक्तीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में हर्षल फाउंडेशन के कार्यों को सराहना मिलने से संस्था के सदस्यों और पदाधिकारियों का उत्साह बढ़ा।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, हर्षल फाउंडेशन के संरक्षक मेजर जनरल शम्मी सब्बरवाल, ट्रस्टी सचिव डॉ. रमा गोयल, के.एम. अग्रवाल, इन्द्रेश गोयल, श्रवण कुमार मित्तल, प्रवीण गर्ग, जनक शर्मा, कल्पना अग्रवाल, अनुपम शर्मा और सिंधु गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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