देहरादून के केंद्रीय विद्यालय ‘क्रमांक-2’ भारतीय सर्वेक्षण विभाग में 37वीं संभागीय युवा संसद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ

Sep 2, 2026 - 09:30
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देहरादून के केंद्रीय विद्यालय ‘क्रमांक-2’ भारतीय सर्वेक्षण विभाग में 37वीं संभागीय युवा संसद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ

(अनुज सेमवाल द्वारा)

*युवा संसद में गूंजा लोकतंत्र का स्वर, विद्यार्थियों ने दिखाई संसदीय प्रतिभा

देहरादून – देहरादून के हाथीबड़कला स्थित केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, भारतीय सर्वेक्षण विभाग में 37वीं संभागीय युवा संसद प्रतियोगिता 2026-27 का गरिमामय आगाज हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था, भारतीय संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों की प्रभावी झलक प्रस्तुत की।

समारोह में भूतपूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, केंद्रीय विद्यालय संगठन की उपायुक्त प्रीति सक्सेना, सहायक आयुक्त सुरजीत सिंह, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 देहरादून के प्राचार्य मयंक शर्मा तथा विधायक प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप डोभाल सहित विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे प्रतिभागी विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों की सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से हुई। इसके बाद उत्तराखंड की लोकसंस्कृति पर आधारित लोकनृत्य और कबीर के दोहों की प्रस्तुति ने समारोह में भारतीय सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों का रंग भर दिया।विद्यालय के प्राचार्य विजय नैथानी ने अतिथियों का हरित स्वागत करते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंचे विद्यार्थियों और शिक्षकों का स्वागत करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

सहायक आयुक्त सुरजीत सिंह ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।उपायुक्त प्रीति सक्सेना ने कहा कि युवा संसद विद्यार्थियों के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को व्यवहारिक रूप से समझने का प्रभावी माध्यम है। इस मंच पर विद्यार्थी न केवल संसद की कार्यप्रणाली से परिचित होते हैं, बल्कि अधिकारों, कर्तव्यों, दायित्वों, नियमों और कानून निर्माण की प्रक्रिया को भी समझते हैं।

उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, तार्किक सोच, आत्मविश्वास और प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रतियोगिता को केवल जीत-हार के नजरिए से नहीं, बल्कि सीखने और व्यक्तित्व विकास के अवसर के रूप में लेने का आह्वान किया।

भूतपूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने विद्यार्थियों को संसद की कार्यप्रणाली और संसदीय मर्यादाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संसद में जनप्रतिनिधि किस प्रकार अपनी बात को तर्क और तथ्यों के साथ रखते हैं तथा कानून निर्माण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि वे अपनी बात को तार्किक और प्रभावशाली ढंग से रखने की कला विकसित करें तथा संविधान की मूल भावना को समझें। उन्होंने विद्यार्थियों को देश के जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

युवा संसद प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ संसदीय गतिविधियों का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक चेतना के साथ नेतृत्व, अभिव्यक्ति, निर्णय लेने और तार्किक चिंतन की क्षमता को विकसित करना है।

प्रतियोगिता के मंच पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह भी दर्शाया कि विद्यालय स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की समझ विकसित करने के लिए ऐसे आयोजन कितने प्रभावी हो सकते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की हिंदी अध्यापिका पूनम उपाध्याय ने अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सभी के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रेरक संबोधनों और संसदीय गतिविधियों के बीच शुरू हुई 37वीं संभागीय युवा संसद प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

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