नवरात्रि पर 5 नेताओं की खुली किस्मत, कैबिनेट मंत्री के तौर पर ली शपथ, CM ने साधे क्षेत्रीय जातीय समीकरण
रैबार डेस्क: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार धामी मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है। लोक भवन में शुक्रवार सुबह 10:00 बजे 5 नव नियुक्त कैबिनेट मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। राज्यपाल ने विधायक मदन कौशिक, भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा और खजान दास को मंत्री पद की शपथ दिलाई। अब 12 मंत्रियों के साथ धामी कैबिनेट फुल हो गई है।
2027 के चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार सियासी रूप से बेहद खास माना जा रहा है। सीएम धामी ने मंत्रियों को चुनने में क्षेत्र और समुदाय का बेहतरीन संतुलन साधा है। 2022 में सरकार के गठन के बाद से ही मंत्रिमंडल के कई पद खाली चल रहे थे, जिसके बाद बार बार कैबिनेट विस्तार के कयास लगाए जा रहे थे। आखिरकार सरकार के कार्यकाल को चार साल पूरा होने से ठीक तीन दिन पहले मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया गया है।

ये विधायक बने नए मंत्री
रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भरत चौधरी लगातार दूसरी बारप चुनाव जीते हैं। रुद्रप्रयाग जिले को लंबे समय बाद कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिला है।
रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। प्रदीप बत्रा लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं।
हरिद्वार से 5 बार के विधायक मदन कौशिक को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मदन कौशिक इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
राजपुर सीट से विधायक खजान दास को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। खजान दास पहले भी मंत्री रह चुके हैं औऱ तीसरी बार विधायक बने हैं।
मंत्रियों की सूची में भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा की एंट्री को सरप्राइज माना जा रहा है। कैड़ा भीमताल से 2017 में निर्दलीय विधायक बने थे जबकि 2022 में बीजेपी से विधायक बने थे।
धामी सरकार ने कैबिनेट विस्तार के जरिए जातीगत गणित के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति को साधने की कोशिश की। साथ ही रूठे नेताओं को फिर से मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। उत्तराखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और हरिद्वार विधायक मदन कौशिक को मंत्रिमंडल में तवज्जो दी गई है। वहीं भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा को भी मंत्री पद से नवाजा गया है। वहीं रुड़की से तीन बार के विधायक प्रदीप बत्रा को भी मंत्री बनाया गया है।
धामी की लीडरशिप पर अटकलें खत्म
उत्तराखंड की राजनीति में वर्षों से एक अनकही परंपरा चली आ रही थी कार्यकाल का अंतिम वर्ष आते-आते, विशेषकर मार्च के आसपास, नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय मान लिया जाता था। यह एक तरह से राजनीतिक अस्थिरता का प्रतीक बन चुकी थी। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्थापित धारणा को न केवल चुनौती दी, बल्कि उसे निर्णायक रूप से ध्वस्त कर दिया। कैबिनेचट विस्तार के साथ इन कयासों को पूरी तरह से खत्म कर दिया। यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश है नेतृत्व में विश्वास, संगठन में संतुलन और भविष्य की स्पष्ट रणनीति। धामी ने यह दिखाया है कि वे परिस्थितियों के शिकार नहीं बल्कि उन्हें अपने पक्ष में मोड़ने वाले नेतृत्वकर्ता हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के इस फैसले ने एक और संकेत साफ कर दिया है भाजपा अब उत्तराखंड में नेतृत्व को लेकर किसी प्रयोग के मूड में नहीं है। धामी केवल वर्तमान के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति के केंद्र बिंदु बन चुके हैं। यही कारण है कि अब यह चर्चा केवल अटकल नहीं, बल्कि एक संभावित रणनीति के रूप में देखी जा रही है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
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