बार-बार पेशाब आना या जलन हो सकती है यूटीआई की चेतावनी! पुरुषों में क्यों बढ़ता है खतरा, जानें लक्षण, कारण और बचाव के आसान तरीके

Jul 21, 2026 - 18:30
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बार-बार पेशाब आना या जलन हो सकती है यूटीआई की चेतावनी! पुरुषों में क्यों बढ़ता है खतरा, जानें लक्षण, कारण और बचाव के आसान तरीके

नई दिल्ली: यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) को आमतौर पर महिलाओं की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह समस्या पुरुषों को भी प्रभावित कर सकती है। यह संक्रमण तब होता है जब बैक्टीरिया मूत्र प्रणाली में प्रवेश कर संक्रमण पैदा कर देते हैं। समय रहते इलाज न मिलने पर यह संक्रमण मूत्राशय से किडनी तक पहुंच सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर उपचार कराना बेहद जरूरी है।

यूटीआई क्या है और कैसे होता है?

यूटीआई मूत्र प्रणाली का संक्रमण है, जिसका असर मूत्राशय, मूत्रमार्ग, किडनी और उन्हें जोड़ने वाली नलिकाओं पर पड़ सकता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से ई-कोलाई बैक्टीरिया के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग के रास्ते मूत्राशय तक पहुंच जाता है। हालांकि महिलाओं में यह अधिक देखा जाता है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं।

पुरुषों में यूटीआई के प्रमुख लक्षण

पुरुषों में यूटीआई होने पर पेशाब करते समय जलन महसूस होना, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेशाब से दुर्गंध आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए तो पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द, बुखार, ठंड लगना और उल्टी जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

किन लोगों में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, कम पानी पीने वाले, लंबे समय तक पेशाब रोककर रखने वाले, किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले व्यक्तियों में यूटीआई का खतरा अधिक रहता है। महिलाओं में यौन सक्रियता भी एक प्रमुख जोखिम कारक मानी जाती है। संक्रमण की पुष्टि के लिए यूरिन टेस्ट कराया जाता है।

समय पर इलाज क्यों है जरूरी?

यदि यूटीआई का इलाज समय पर न किया जाए तो संक्रमण मूत्राशय से किडनी तक फैल सकता है। इससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और पहले से किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों में जटिलताएं बढ़ सकती हैं। गंभीर मामलों में संक्रमण खून के जरिए शरीर के अन्य अंगों तक भी पहुंच सकता है।

यूटीआई का उपचार कैसे किया जाता है?

कुछ हल्के संक्रमण बिना दवा के भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। डॉक्टर आमतौर पर अधिक मात्रा में पानी पीने, तरल पदार्थ लेने और बार-बार पेशाब करने की सलाह देते हैं ताकि बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकल सकें। यदि संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए तो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज की जरूरत भी पड़ सकती है।

डायबिटीज के मरीजों को क्यों रहना चाहिए अधिक सतर्क?

मधुमेह से पीड़ित लोगों में यूटीआई का खतरा अधिक होता है। इसकी वजह कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, रक्त में बढ़ा हुआ शुगर स्तर और मूत्राशय का पूरी तरह खाली न हो पाना माना जाता है। ऐसे मरीजों को शुरुआती लक्षण दिखते ही चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इन उपायों से किया जा सकता है बचाव

यूटीआई से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, लंबे समय तक पेशाब न रोकना, निजी अंगों की साफ-सफाई बनाए रखना और अनावश्यक हाइजीन स्प्रे के इस्तेमाल से बचना चाहिए। यौन संबंध बनाने से पहले और बाद में पेशाब करना भी संक्रमण के खतरे को कम करने में मददगार माना जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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