जंतर मंतर टु देहरादून वाया बांकीपुर,भाजपा के 32 विधायकों के कट सकते हैं टिकट, CM को भी सेफ सीट की तलाश
रैबार डेस्क: जंतर मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन और हाल में उपचुनाव के नतीजों का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जिस वक्त भाजपा बिहार की बांकीपुर सीट से चुनाव हारने का सदमा झेल रही थी, तकरीबन उसी वक्त उत्तराखंड भाजपा के एक आंतरिक सर्वे ने भी उथल पुथल मचा दी।
दरअसल पार्टी और संघ की ओर से राज्य में अपने हिस्से की सभी 47 सीटों पर आंतरिक सर्वे करया गया। संघ के सूत्रों के मुताबिक बीते दो महीने में राज्य की सभी 70 सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, महत्वपूर्ण हस्तियों के अलावा सामान्य लोगों से अलग-अलग माध्यमों से संपर्क के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। इस सर्वे ने सिटिंग विधायकों की नींद उड़ा दी है। क्योंकि भाजपा के 32 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी है। ऐसे में अगर इन विधायकों को फिर से टिकट दिया गया तो पार्टी को विपक्ष में बैठने को मजबूर होना पड़ सकता है। लिहाजा इन 32 विधायकों के टिकटों पर संशय बन हुआ है।
हालांकि सर्वे रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा इतना नहीं है, डितना स्थानीय स्तर पर विधायकों के कामकाज को लेकर है। लोग मानते हैं कि भाजपा के दस साल के शासन में विकास के कई कार्य हुए हैं। हालांकि इस दौरान स्थानीय विरोध का स्वर मजबूत हुआ है। आंतरिक कलह, कुछ स्तरों पर प्रशासनिक ढिलाई, युवाओं में सामान्य नाराजगी की भी बात सामने आई है, जिसे जल्द से जल्द दुरुस्त करने की पहल की जाएगी। लिहाजा 2027 के चुनाव में पार्टी इन 32 उम्मीदवारों को बदलने या फिर उनकी सीट बदलने पर विचार कर सकती है।
रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि जिन 23 सीटों पर भाजपा पिछला चुनाव हारी थी, उनमें से 10 सीटों पर पहले के मुकाबलि स्थिति थोड़ा बेहतर हुई है। भाजपा नेतृत्व मुख्यमंत्री के लिए भी सेफ सीट तलाश रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सीएम धामी लिए ऐसी सीट तलाशी जाए, जिससे वह चुनाव के दौरान पूरे राज्य में तनावमुक्त हो कर चुनाव प्रचार कर सकें। गौरतलब है कि बीते चुनाव में खटीमा सीट से हारने के बाद धामी ने उपचुनाव में चंपावत सीट से जीत दर्ज की थी।
सूत्र के मुताबिक राज्य में विपक्ष के मजबूत या कमजोर होने का परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ता, मुख्य मुद्दा स्थानीय स्तर की नाराजगी का होता है। राज्य में दिवंगत भुवन चंद खंडूरी के सीएम रहते कांग्रेस बेहद कमजोर थी, हालांकि तब भी विधायकों और उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों की नाराजगी के कारण भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी। लिहाजा भाजपा इस बार कांग्रेस को हल्के मे लेकर चलने की भूल नहीं करेगी।
माना जा रहा है कि चुनावी रणनीति पर मंथन के लिए आज नई दिल्ली में भाजपा उत्तराखंड प्रदेश कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट सहित प्रदेश कोर ग्रुप के सदस्य शामिल होंगे। इस बैठक में आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट पर भी चर्चा की जा सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस आंतरिक सर्वे के आधार पर टिकटों का बंटवारा होता है? और अगर सच में 32 टिकट काटे गए तो पार्टी में असंतोष तो नहीं उभरेगा?
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