‘मुझे बदनाम करने की साजिश हो रही है’, अकाल तख्त के फैसले पर बोले भगवंत मान; वायरल वीडियो विवाद पर दी सफाई

Jun 17, 2026 - 00:30
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‘मुझे बदनाम करने की साजिश हो रही है’, अकाल तख्त के फैसले पर बोले भगवंत मान; वायरल वीडियो विवाद पर दी सफाई

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त द्वारा धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीके से प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक उद्देश्यों से धर्म का इस्तेमाल कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को कहा कि हाल ही में एक वायरल वीडियो को लेकर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज की ओर से हुकुमनामा जारी किया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिस वीडियो को आधार बनाकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह उनका वीडियो नहीं है और इस संबंध में उन्होंने अपना पक्ष अकाल तख्त के समक्ष भी स्पष्ट कर दिया है।

‘वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुझसे मेल नहीं खाता’

भगवंत मान ने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति शारीरिक बनावट और अन्य पहलुओं के आधार पर उनसे मेल नहीं खाता। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थाओं में ऊंचे पदों पर बैठे कुछ लोग अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पंजाब, किसानों और कृषि हितों के लिए लगातार काम कर रही है। ऐसे में कुछ लोगों को उनके फैसले रास नहीं आ रहे हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

अकाल तख्त का सम्मान, लेकिन फैसलों पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है और वह स्वयं भी उसका सम्मान करते हैं। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण कुछ फैसले बदले की भावना से लिए जा रहे हैं।

भगवंत मान ने कहा कि सिख संगत पूरी स्थिति को समझ रही है और जानती है कि किस तरह के हालात में ये फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने बेअदबी रोकने के लिए कानून बनाया, जिसकी व्यापक सराहना हो रही है, लेकिन उसी कानून पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बेअदबी-रोधी कानून का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा लाया गया बेअदबी-रोधी कानून उन कदमों में शामिल है, जिनकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन संस्थाओं ने पहले ऐसे कानून की मांग की थी, वही अब उसका विरोध कर रही हैं।

मान ने कहा कि वह पंजाब के हित में दिन-रात काम कर रहे हैं और जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी करार दिया। यह फैसला एक कथित वायरल वीडियो के आधार पर लिया गया, जिसमें उन पर सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कने का आरोप लगाया गया है।

अकाल तख्त ने उन्हें “गुरु दोखी” और “खालसा पंथ विरोधी” बताते हुए सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है।

29 जून को सिख विधायकों और मंत्रियों को बुलाया गया

अकाल तख्त ने यह भी घोषणा की है कि पंजाब के सभी सिख विधायक, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश हों।

उन पर जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 पारित कर सिख समुदाय की भावनाओं और हितों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।

फोरेंसिक रिपोर्ट का भी हवाला

जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दावा किया कि दो सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच में संबंधित वायरल वीडियो को वास्तविक पाया गया है। उनके अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो न तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किया गया है और न ही उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई है।

अकाल तख्त ने पंजाब सरकार द्वारा पारित जगत जोत श्री गुरुग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के कुछ प्रावधानों पर भी आपत्ति जताते हुए इसे पहले “काला कानून” बताया था और इसे वापस लेने की मांग की थी।

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