राहुल गांधी पर भड़के पूर्व सैन्य अफसर, अजित डोभाल पर लगाए आरोपों से नाराजगी, सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल तोड़ने को बताया खतरनाक
पूर्व मेजर जनरल सम्मी सबरवाल ने कहा- राजनीतिक विरोधियों पर हमला अलग बात, सेना-सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश देश के लिए खतरनाक
देहरादून: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अजीत डोभाल पर टिप्पणी को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई है. मेजर जनरल सम्मी सबरवाल ने कहा कि जो संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति खुद जवाब नहीं दे सकता, उस पर हमले करना गलत है. उधर एक अन्य पूर्व सैनिक जो थर्ड पैराशूट रेजिमेंट के कमांडो रहे हैं उन्होंने देश में चल रही गतिविधियों को गहरी साजिश बताया है.
अजित डोभाल पर राहुल गांधी के बयान से पूर्व सैन्य अफसर नाराज: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर अब पूर्व सैन्य अधिकारी भी खुलकर सामने आ रहे हैं. पूर्व मेजर जनरल सम्मी सबरवाल ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि-
राजनीति में विरोधियों पर हमला करना अलग बात है, लेकिन सेना और सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश देश के लिए खतरनाक हो सकती है. संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े ऐसे पदों पर बैठे लोग हर राजनीतिक आरोप का जवाब नहीं दे सकते. ऐसे में उनके खिलाफ लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना ठीक नहीं है.
-मेजर जनरल सम्मी सबरवाल, पूर्व सैन्य अफसर-
राजनीति करनी है तो विरोधियों के साथ करें: मेजर जनरल सम्मी सबरवाल ने कहा कि अगर किसी को राजनीति करनी है, तो वह अपने राजनीतिक विरोधियों पर सवाल उठाए, लेकिन ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाना ठीक नहीं है, जो अपने पद की मर्यादा के कारण खुलकर अपना बचाव नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों और सेना का मनोबल कमजोर करने वाली बातें आज नहीं तो कल देश के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं.
सबरवाल के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों पर बैठे लोगों के कामकाज पर सवाल उठाना और उनके खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना, जिससे जनता के मन में संदेह पैदा हो, दोनों अलग-अलग बातें हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई अधिकारी अपने पद की सीमाओं के कारण जवाब नहीं दे सकता, तो क्या उसके खिलाफ लगाए जा रहे हर आरोप को बिना जवाब के छोड़ दिया जाना चाहिए.
‘पहले संस्थाओं पर भरोसा कमजोर करो, फिर सवाल उठाओ’: पूर्व मेजर जनरल ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कुछ देशों में चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं पर सवाल उठाने के बाद राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की रणनीति अपनाई गई. उन्होंने इसे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए से जुड़ी कथित रणनीति बताते हुए आशंका जताई कि भारत में भी इसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश हो सकती है.
पूर्व मेजर जनरल सबरवाल ने राहुल गांधी के पेगासस वाले आरोप का किया जिक्र: हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. सबरवाल ने कहा का राहुल गांधी ने पहले पेगासस मामले में भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि जब आरोप लगाए जाते हैं तो उन्हें साबित करने की जिम्मेदारी भी होनी चाहिए. उनके मुताबिक, आरोप लगाने के बाद जवाबदेही से बचना सही तरीका नहीं है. उन्होंने इसे ‘शूट एंड स्कूट’ की रणनीति बताते हुए कहा कि पहले आरोप लगा दो और जब जवाब मांगा जाए तो पीछे हट जाओ. उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस तरह की राजनीति से जनता का संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हो सकता है.
‘फौजी का काम सबूत जुटाना नहीं, देश की रक्षा करना है’: पूर्व सैनिक शमशेर सिंह बिष्ट ने भी सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उठने वाले सवालों पर नाराजगी जताई. थर्ड पैराशूट रेजिमेंट के कमांडो रहे बिष्ट ने कहा कि-
मैंने सेना को करीब से देखा है और सैनिकों का सबसे बड़ा काम देश की रक्षा करना है. सीमा पर दुश्मन से मुकाबला करने वाले जवानों से हर कार्रवाई के सबूत इकट्ठा करने की उम्मीद नहीं की जा सकती. सैनिकों का काम देश की सुरक्षा करना और दुश्मन के हमले का जवाब देना है. दिल्ली में बैठकर सैन्य कार्रवाई के सबूत मांगना आसान है, लेकिन सीमा पर जाकर हालात का सामना करना अलग बात है.
-शमशेर सिंह बिष्ट, पूर्व सैन्य अफसर-
उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग सैनिकों की कार्रवाई पर सवाल करते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि सेना किन परिस्थितियों में काम करती है. उनके मुताबिक, सैन्य अभियानों को लेकर राजनीतिक बहस करते समय जवानों के काम और उनकी जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान देश के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं.
डोभाल पर टिप्पणी से उत्तराखंड में भी सियासी विवाद: अजीत डोभाल उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से ताल्लुक रखते हैं और देश की सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं. ऐसे में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर उत्तराखंड में भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को उत्तराखंड के स्वाभिमान से जोड़ते हुए उनकी आलोचना की है. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से भी इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की.
हालांकि, इस पूरे विवाद का अहम सवाल यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही और उनके पद की मर्यादा के बीच संतुलन कैसे रखा जाए. राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में तथ्य और प्रमाण भी जरूरी हैं. वहीं, पूर्व सैन्य अधिकारियों की नाराजगी यह दिखाती है कि सेना और सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को लेकर यह बहस अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है.
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