साहसिक पर्यटन में उत्तराखंड की ऊंची छलांग: 83 हिमालयी चोटियां खुलीं, भारतीय पर्वतारोहियों को फीस से बड़ी राहत

Feb 3, 2026 - 18:30
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साहसिक पर्यटन में उत्तराखंड की ऊंची छलांग: 83 हिमालयी चोटियां खुलीं, भारतीय पर्वतारोहियों को फीस से बड़ी राहत

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पर्वतारोहण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने वन विभाग के साथ समन्वय करते हुए गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए पूरी तरह खोल दिया है। इस फैसले को उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने वाला कदम माना जा रहा है।

5,700 से 7,756 मीटर तक की चुनौतीपूर्ण चोटियां खुलीं
खोली गई इन पर्वत चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से लेकर 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध और तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं। ये शिखर न सिर्फ रोमांच और कठिनाई के लिए जाने जाते हैं, बल्कि हिमालय की प्राकृतिक भव्यता और सौंदर्य के प्रतीक भी माने जाते हैं।

सीएम धामी बोले—हिमालय हमारी पहचान और शक्ति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, विरासत और शक्ति है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि देश के युवा पर्वतारोहण जैसे साहसिक क्षेत्रों में आगे आएं, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित हो। राज्य सरकार सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत पर्वतारोहण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत
इस फैसले के तहत अधिसूचित 83 पर्वत चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों से किसी भी तरह का अभियान शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसमें पीक फीस, कैंपिंग फीस और पर्यावरण शुल्क शामिल हैं। पहले यह शुल्क भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) और वन विभाग द्वारा लिया जाता था, लेकिन अब इसका पूरा वहन राज्य सरकार करेगी। इससे आर्थिक कारणों से पर्वतारोहण से दूर रहने वाले युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए भी आसान नियम
विदेशी पर्वतारोहियों पर पहले लगने वाला राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क भी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल IMF द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपील बढ़ेगी और विदेशी पर्वतारोहण अभियानों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।

ऑनलाइन सिस्टम से मिलेगी अनुमति
अब सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए किए जाएंगे। यह पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था है, जिससे अनुमति प्रक्रिया तेज होगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस निर्णय से सीमावर्ती और दूर-दराज के गांवों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर सख्त नजर
राज्य सरकार ने साफ किया है कि सभी पर्वतारोहण अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रह सके।

केंद्र सरकार के बजट से भी मिलेगा सहारा
गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को बढ़ावा देने की घोषणा की है। बजट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने का ऐलान किया गया है। यह कदम भारत को विश्वस्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


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