हिंदी के विरोध से सत्ता मिल सकती है लेकिन देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा

Jun 3, 2026 - 00:30
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हिंदी के विरोध से सत्ता मिल सकती है लेकिन देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा

मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के कार्यक्रम में बोले मुख्यमंत्री फडणवीस

मुंबई : भाषा विवाद का माध्यम नहीं हो सकती हिंदी इस देश की संपर्क सूत्र है। भाषाओं के नाम पर विवाद पैदा कर वोट और सत्ता तो हासिल की जा सकती है लेकिन इससे देश का ज्ञान समाप्त हो जाएगा और इसे हम आने वाली पीढ़ियों तक नहीं पहुंचा पाएंगे। इसलिए विशेष रूप से हिंदी जैसी भाषा का सम्मान होना चाहिए जिसने हमारी स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान दिया है। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह बात कही।

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस सामारोह में उन्होंने कहा कि बहुभाषी होना एक योग्यता है हमें अपनी भाषा तो सीखनी ही चाहिए क्योंकि मातृभाषा छोड़ने पर हम एक बहुत ही नैसर्गिक ज्ञान प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। लेकिन अगर मातृभाषा के अलावा अगर हम देश की कोई और भाषा सीखेंगे तो देश का ज्ञान बटोर पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया के जिन देशों ने विकास किया है उन्होंने अपनी मातृभाषाओं में ही पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के सामने आज बड़ी चुनौतियां हैं क्योंकि खबरों की विश्वसनीयता को लेकर संकट है। खासकर डिजिटल मीडिया आने के बाद हालात चुनौती पूर्ण हुए हैं मैं मानता हूं कि यह अस्थायी है और इसे पीछे थोड़कर पत्रकारिता पुराने मूल्यों पर स्थापित होगी।

कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि मौजूद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि हिंदी और देश की दूसरी भाषाओ में कोई टकराव नहीं है और हिंदी तभी आगे बढ़ेगी जब क्षेत्रीय भाषाएं आगे बढ़ेगी। उन्होंने भी मातृभाषा में पढ़ाई की वकालत की। मुंबई भाजपा अध्यक्ष और विधायक अमित साटम ने कहा कि हिंदी एक धागा है जो पूरे देश को को बांधता है लेकिन इसका विरोध कुछ लोगों के लिए फैशन बन गया है जबकि उनके बच्चे फ्रेंच, जर्मन जैसी भाषाएं पढ़ते हैं।

मंत्री और विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा कि अब मुंबई के किसी भी कोने में खड़े होकर हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान का नारा लगाया का सकता है। हिंदी जोड़ने वाली भाषा है तोड़ना हमारे संस्कारों में नहीं है। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने कहा कि जब माला बनती है तो उसमें एक सूत्र लगता है मुझे लगता है कि भारत के लिए यह सूत्र हिंदी भाषा ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का रिश्ता बहुत पुराना है। फिल्म छावा में मैंने जिस कवि कलश की भूमिका निभाई थी वे भी उत्तर प्रदेश के थे। उन्होंने कवि कलश की कविता भी लोगों के सामने प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने कहा कि एआई भले ही चुनौतीपूर्ण लगती है लेकिन यह संपादक जैसा दिमाग नहीं चला सकती। मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के महासचिव विजय सिंह कौशिक ने कहा कि हिंदी की पहला समाचार पत्र एक गैर हिंदी भाषा प्रदेश कोलकाता से शुरू हुआ और हम इस उपलब्धि के 200 साल पूरे होने का समारोह एक मराठी भाषी राज्य में मना रहे हैं यह विविधता में एकता की हमारी परंपरा बयान करता है। उन्होंने पत्रकारिता के शुरुआती दौर में मराठी भाषा पत्रकारों के योगदान को भी याद किया।

इन्हें किया गया सम्मानित
प्रभादेवी स्थित रविंद्र नाट्यमंदिर में आयोजित समारोह में हिंदी भाषा, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त समिति, लखनऊ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, सुप्रसिद्ध अभिनेता विनीत कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अवधेश व्यास, गंगाधर ढोबले और कुमुद संघवी चावरे को सम्मानित किया गया। इस मौके पर पत्रकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गई गणमान्यों ने हाजिरी लगाई। कार्यक्रम में मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम, विधायक राजहंस सिंह, संजय उपाध्याय, मुरजी पटेल, सिद्धविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आर्चाय पवन त्रिपाठी, योगायतन ग्रुप ऑफ कंपनी के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रताप सिंह, उद्योगपति ज्ञान प्रकाश सिंह, प्रदेश भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष संजय पांडेय, उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर एन सिंह, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र, कार्यकारणी सदस्य हरीगोविन्द विश्वकर्मा, अखिलेश मिश्र, अखिलेश तिवारी, अशोक शुक्ला, सैयद सलमान आदि मौजूद थे।

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