अन्ना हजारे के विरोध के बीच महाराष्ट्र सरकार बैकफुट पर! RTI के नए नियमों पर लगाई रोक, भूख हड़ताल से पहले बड़ा फैसला

Jul 3, 2026 - 00:30
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अन्ना हजारे के विरोध के बीच महाराष्ट्र सरकार बैकफुट पर! RTI के नए नियमों पर लगाई रोक, भूख हड़ताल से पहले बड़ा फैसला

मुंबई: सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून में किए गए विवादित बदलावों को लेकर बढ़ते विरोध के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राज्य सरकार ने हाल ही में लागू किए गए ‘महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026’ पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने नियमों के विरोध में 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी थी।

सूत्रों के अनुसार, नए नियमों को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों की ओर से लगातार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की समीक्षा कर नियमों के अमल पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

क्या थे नए RTI नियम?

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी और 12 जून को राजपत्र में प्रकाशित इन नियमों के तहत सूचना मांगने के लिए आवेदन शुल्क 30 रुपये निर्धारित किया गया था। इसके अलावा सूचना की प्रति प्राप्त करने, स्कैन कॉपी लेने और अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए भी अलग-अलग शुल्क तय किए गए थे।

नियमों के अनुसार ए-4 आकार के प्रत्येक पृष्ठ की प्रति और डिजिटल कॉपी के लिए 5 रुपये शुल्क रखा गया था। वहीं, रिकॉर्ड का एक घंटे तक निरीक्षण निःशुल्क था, लेकिन इसके बाद प्रति घंटे 50 रुपये देने का प्रावधान किया गया था।

एक आवेदन, एक विषय और 150 शब्द की सीमा

नए नियमों में यह भी कहा गया था कि आरटीआई आवेदन सामान्यतः केवल एक विषय से संबंधित होना चाहिए और उसकी लंबाई लगभग 150 शब्दों तक सीमित रहे। यदि किसी आवेदन में एक से अधिक विषय शामिल होते, तो जन सूचना अधिकारी केवल पहले विषय पर कार्रवाई कर सकता था और बाकी विषयों के लिए अलग आवेदन देने की सलाह दी जाती।

पहचान पत्र लगाना भी किया गया था अनिवार्य

संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक आवेदक को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने वाले फोटो पहचान पत्र की स्व-सत्यापित प्रति आवेदन के साथ जमा करना अनिवार्य किया गया था। ऐसा न करने पर आवेदन वापस किया जा सकता था।

इसके अलावा यदि मांगी गई जानकारी पहले से किसी सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होती, तो विभाग को उसकी अलग प्रति देने की आवश्यकता नहीं होती और आवेदक को वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करने के लिए कहा जा सकता था।

अपील प्रक्रिया भी हुई थी महंगी

नियमों में प्रथम अपील के लिए 50 रुपये और राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल करने के लिए 100 रुपये शुल्क तय किया गया था। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करना भी अनिवार्य बनाया गया था।

अन्ना हजारे ने बताया था RTI की भावना के खिलाफ

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने इन नियमों का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि इससे सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना कमजोर होगी। उनका कहना था कि नए प्रावधान आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को अधिक जटिल, महंगी और कठिन बना देंगे।

मुख्यमंत्री को भेजे गए अपने ज्ञापन में हजारे ने मांग की थी कि नियमों को पूरी तरह वापस लिया जाए और नए प्रावधान तैयार करने से पहले आरटीआई विशेषज्ञों, सूचना आयुक्तों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कानून विशेषज्ञों और आम नागरिकों से व्यापक चर्चा की जाए।

सरकार ने फिलहाल लगाया ब्रेक

विरोध और राजनीतिक हलचल के बीच राज्य सरकार ने फिलहाल इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अब माना जा रहा है कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत और समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय कर सकती है।

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