बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी के 7 नेताओं को फांसी की सजा, मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप; सभी की गैरमौजूदगी में चला मुकदमा

Sep 16, 2026 - 00:30
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बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी के 7 नेताओं को फांसी की सजा, मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप; सभी की गैरमौजूदगी में चला मुकदमा

ढाका: बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने प्रतिबंधित अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई है। इन नेताओं पर 2024 में छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों, जिन्हें ‘जुलाई विद्रोह’ कहा गया, के दौरान हिंसा का निर्देश देने, उसे भड़काने और बढ़ावा देने का आरोप था। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी ने की। सभी सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला।

मौत की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादेर, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं। इनके अलावा जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फजले शम्स परश, महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष साद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनान को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसले के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त बचाव पक्ष के वकील अदालत में मौजूद थे।

22 जनवरी को तय हुए थे सात आरोप

ट्रिब्यूनल ने 22 जनवरी को सातों आरोपियों के खिलाफ सात आरोप तय किए थे और 17 फरवरी से मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। ICT-2 ने 2024 के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा का निर्देश देने और उसे भड़काने में आरोपियों की कथित भूमिका की जांच की।

इन प्रदर्शनों ने आखिरकार 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपियों ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए निर्देश जारी किए, भड़काऊ बयान दिए और उन बैठकों में हिस्सा लिया जहां हिंसा की योजनाओं पर चर्चा हुई थी। उन पर हथियारबंद हमलों, बड़े पैमाने पर दमन और अलग-अलग स्थानों पर मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशों में शामिल होने के भी आरोप लगाए गए। अभियोजन के मुताबिक, इन घटनाओं के कारण हत्या, हत्या के प्रयास और देशभर में व्यापक हिंसा हुई।

शेख हसीना को भी सुनाई जा चुकी है मौत की सजा

शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत चली गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। नवंबर 2025 में इसी ट्रिब्यूनल ने हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी।

ट्रिब्यूनल ने हसीना को ‘सुपीरियर कमांड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ के सिद्धांत के तहत दोषी माना था। अदालत के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के अनुसार, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में 1,400 तक लोगों की मौत हुई थी।

हसीना की सजा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे सवाल

शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हुई थी। कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने मुकदमे की निष्पक्षता और अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि मुकदमे और सजा से न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता जताई थी।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया था कि हसीना को अपनी पसंद के वकील के जरिए अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला।

1971 के युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए बना था ट्रिब्यूनल

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना हसीना सरकार ने 2010 में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए मानवता के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए की थी। हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने ट्रिब्यूनल के कानून में संशोधन किए। इन संशोधनों में राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार भी शामिल किया गया।

हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पूरे बांग्लादेश में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामलों में अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई है।

दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की बात कह चुकी हैं हसीना

इस बीच शेख हसीना ने पिछले महीने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के लिए दृढ़ हैं और देश को ‘सही रास्ते’ पर लाना चाहती हैं। उन्होंने कहा था कि जेल जाने या मौत की सजा के खतरे से भी वह पीछे नहीं हटेंगी।

नई दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में हसीना केवल ऑडियो के जरिए शामिल हुई थीं। भारत आने के बाद मीडिया से यह उनकी पहली सार्वजनिक बातचीत थी। कार्यक्रम में मौजूद लोग उन्हें देख नहीं सके और केवल उनकी आवाज सुनाई दी।

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