मणिकर्णिका विवाद : प्राण-प्रतिष्ठित मंदिर को तोड़े जाने का फैलाया गया भ्रम

Jan 19, 2026 - 00:30
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मणिकर्णिका विवाद : प्राण-प्रतिष्ठित मंदिर को तोड़े जाने का फैलाया गया भ्रम

एआई से गढ़ा गया झूठ, काशी को बदनाम करने की साजिश, मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परिसर का हिस्सा है, जहां न केवल मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है बल्कि वहां आज भी नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन जारी हैं, कोई भी श्रद्धालु मौके पर जाकर स्वयं इसकी पुष्टि कर सकता है

सुरेश गांधी

वाराणसी : मोक्ष की नगरी काशी को एक बार फिर डिजिटल झूठ और सियासी अफवाहों के जरिए बदनाम करने की कोशिश सामने आई है। मणिकर्णिका घाट परियोजना के नाम पर श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित प्राचीन एवं प्राण-प्रतिष्ठित ‘समुद्रमंथन महादेव मंदिर’ की तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से मॉर्फ कर यह भ्रम फैलाया गया कि मंदिर को तोड़ दिया गया है। जबकि प्रशासन द्वारा जारी वास्तविक तस्वीरें इस पूरे दावे को सिरे से झूठ साबित करती हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि समुद्रमंथन महादेव मंदिर मणिकर्णिका घाट पर स्थित ही नहीं है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परिसर का हिस्सा है, जहां न केवल मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है बल्कि वहां आज भी नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन जारी हैं। कोई भी श्रद्धालु मौके पर जाकर स्वयं इसकी पुष्टि कर सकता है।

एआई से रची गई तस्वीरें, गढ़ा गया डर
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कुछ असामाजिक और अराजक तत्वों ने जानबूझकर मंदिर की पुरानी व वास्तविक तस्वीरों को मलबे, खुदाई और ध्वस्तीकरण के दृश्यों के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल किया। इन तस्वीरों को इस तरह पेश किया गया मानो मणिकर्णिका घाट परियोजना के दौरान मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया हो। अधिकारियों के मुताबिक, वायरल की जा रही कई तस्वीरें एआई जनरेटेड, मॉर्फ्ड और संदर्भ से काटकर पेश की गई हैं। इनका उद्देश्य केवल एक था, धार्मिक भावनाएं भड़काना, भ्रम पैदा करना और विकास कार्यों के खिलाफ माहौल बनाना।

प्रशासन का साफ संदेशः कोई मंदिर नहीं टूटा
जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग ने दो टूक कहा है कि मणिकर्णिका घाट परियोजना में किसी भी मंदिर, पौराणिक संरचना या प्राण-प्रतिष्ठित स्थल को क्षति नहीं पहुंचाई जा रही है. सभी ऐतिहासिक धरोहरें पूरी तरह सुरक्षित हैं. निर्माण कार्य परंपरा, संवेदनशीलता और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि समुद्रमंथन महादेव मंदिर से जुड़ी जो तस्वीरें जारी की गई हैं, वे स्वयं प्रशासन द्वारा प्रमाणिक रूप से साझा की गई हैं, ताकि भ्रम का अंत किया जा सके।

अफवाह अब अपराध, सख्त कार्रवाई के संकेत
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि एआई, डीपफेक, मॉर्फिंग और भ्रामक कंटेंट के जरिए धार्मिक भावनाएं भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ा दी गई है और ऐसे अकाउंट्स को चिन्हित किया जा रहा है, जो योजनाबद्ध तरीके से झूठ फैला रहे हैं। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी फोटो या वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. आधिकारिक बयान या जमीनी सच्चाई की स्वयं पुष्टि करें. किसी भी संदिग्ध या भ्रामक कंटेंट को आगे साझा करने से बचें।

विकास के नाम पर पहले भी फैलाया गया था भ्रम
काशी में यह पहली बार नहीं है जब विकास कार्यों के दौरान इस तरह का शोर मचाया गया हो। इससे पहले भी काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, अस्सी घाट, नमो घाट और शहर के सौंदर्यीकरण के समय इसी तरह के दावे किए गए थे। लेकिन हर बार समय ने साबित किया कि विकास ने काशी की आत्मा को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत किया है।

मोक्ष की नगरी में झूठ ज्यादा देर नहीं टिकता
मणिकर्णिका विवाद के बीच सामने आया यह मामला सिर्फ एक मंदिर या एक तस्वीर का नहीं है। यह उस डिजिटल युग की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहां तकनीक का इस्तेमाल सच दिखाने के लिए नहीं, बल्कि सच को ढकने के लिए किया जा रहा ळें लेकिन काशी की परंपरा रही है, यहां चिता की आग केवल शरीर को नहीं, झूठ और भ्रम को भी भस्म कर देती है। और हर बार की तरह, इस बार भी सच सामने है और अफवाहें बेनकाब।

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