शिवरात्रि और बारावफात के मद्देनजर जिले में 26 अगस्त तक लागू रहेगी धारा-163

Jul 1, 2026 - 00:30
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शिवरात्रि और बारावफात के मद्देनजर जिले में 26 अगस्त तक लागू रहेगी धारा-163

Meerut News: आगामी दिनों में शिवरात्रि पर्व, स्वतंत्रता दिवस, ईद-ए-मिलाद/बारावफात तथा विभिन्न आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं एवं महाविद्यालयों की परीक्षाएं प्रस्तावित/हो रही है। मेरठ एक संवेदनशील जिला है। जिसके परिप्रेक्ष्य में यह संभव है कि अराजकतत्वों, समाज विरोधी, शरारती, साम्प्रदायिक एवं आपराधिक प्रवृत्ति के तत्व समाज में साम्प्रदायिक, जातिगत, वर्गगत, विद्वेष तथा अफवाहें फैलाकर सामाजिक समरता, सदभाव व कानून एवं शांति व्यवस्था बिगाडने का सुनियोजित प्रयास कर सकते हैं।
कार्यक्रमों में शांति भंग की जा सकती है
आगामी दिवसों में विभिन्न धार्मिक एवं राजनैतिक संगठनों/संस्थाओ/व्यक्तियों आदि द्वारा जनपद के विभिन्न भागों में धरना, प्रदर्शन, जुलूस मार्च, पदयात्रा इत्यादि द्वारा अथवा अन्य प्रकार के अविधिक, असमाजिक, क्रिया-कलापों एवं कार्यक्रमों से शांति भंग की जा सकती है।
ऐसे में जिलाधिकारी डॉक्टर वीके सिंह ने जनपद के 32 थाना क्षेत्रों में जिसमें महिला थाना भी सम्मिलित है। विराधी तत्वों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु कानून व्यवस्था/लोक प्रशांति बनाये रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक/निषेधात्मक आदेश पारित करना आवश्यक हो गया है।
जिलाधिकारी डा. वीके सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जनपद के सम्पूर्ण क्षेत्र में निम्नवत प्रतिबन्धात्मक/निषेधात्मक आदेश तात्कालिक प्रभाव से पारित किया है।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास नहीं करने दिया जाएगा
डीएम ने कहा कि जनपद में किसी भी व्यक्ति/संस्था/संगठन द्वारा किसी कार्यक्रम/माध्यम से सांप्रदायिक सदभाव व सामाजिक सौहार्द को बिगाडने का प्रयास नहीं किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति/संगठन द्वारा कोई ऐसा कार्यक्रम सार्वजनिक/निजी स्थल पर आयोजित नहीं किया जायेगा जिससे किसी जाति/पंथ/संगठन/धर्म के अनुयायिओ की भावनाओ को आघात पहुंचे और साम्प्रदायिक/धार्मिक उन्माद की स्थिति उत्पन्न हो।
29 जून से 26 अगस्त रात 12 बजे तक आदेश लागू
यह आदेश दिनांक 29 जून 2026 से 26 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि 12.00 बजे तक लागू रहेगा। यह आदेश आवश्यकता बढने पर उक्त तिथियो से पूर्व भी खंडित किया जा सकता है अथवा अवधि बढाई जा सकती है। उपरोक्त आदेश के किसी अंश का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा-223 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा।

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