पद्म भूषण डॉ अनिल जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर कब्जे का आरोप, सेटेलाइट इमेज का दिया हवाला
रैबार डेस्क: पर्यावरणविद और हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी इन दिनों विवादों में घिरे हैं। डॉ जोशी पर आरक्षित वन भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा करने का संगीन आरोप लगा है। कांग्रेस नेता और अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली ने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए सनसनी फैला दी है। चमोली का दावा है कि डॉ. जोशी ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुँचाया है।
शिकायतकर्ता संदीप चमोली ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया है। उन्होंने इसरो भवन और गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेजरी का हवाला देते हुए यह तर्क दिया है कि आरक्षित वन क्षेत्र में डॉ. जोशी द्वारा अवैध निर्माण और कब्जा किया गया है। इन डिजिटल सबूतों ने वन विभाग और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल एक व्यक्ति की साख पर सवाल होगा, बल्कि उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चल रहे संस्थानों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर देगा।

उत्तराखंड में वन भूमि अतिक्रमण एक ऐसा नासूर बन चुका है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि किसी भी कीमत पर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। ऐसे में डॉ जोशी पर लगे आरोपों ने प्रशासन को धर्मसंकट में डाल दिया है। हालांकि अब तक पुलिस या वन विभाग की ओर से डॉ. जोशी के खिलाफ किसी बड़ी आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
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