श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस आचार्य सुभाष जोशी ने बताया गृहस्थाश्रम का आध्यात्मिक महत्व, शिव-पार्वती विवाह में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Aug 8, 2026 - 18:30
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श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस आचार्य सुभाष जोशी ने बताया गृहस्थाश्रम का आध्यात्मिक महत्व, शिव-पार्वती विवाह में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
  • भक्तों के तर्क-कुतर्क और संशय दूर करने को भगवान शंकर ने अपनाया गृहस्थाश्रम

देहरादून : धर्मपुर चौक स्थित सिद्धपीठ प्राचीन श्री शिव मंदिर में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित दिव्य एवं भव्य संगीतमय श्री शिव महापुराण ज्ञान महायज्ञ के सप्तम दिवस कथा व्यास एवं शिव आराधक आचार्य सुभाष जोशी ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव के गृहस्थ जीवन के आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया।

आचार्य सुभाष जोशी ने कहा कि भक्तों के तर्क-कुतर्क, संशय और भ्रम को दूर करने के लिए भगवान शिव ने सती, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं, तथा बाद में माता पार्वती से विवाह कर गृहस्थाश्रम की लीला अपनाई। गृहस्थ धर्म को श्रेष्ठता प्रदान करने के लिए महादेव ने स्वयं आदर्श गृहस्थ का आचरण किया।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने गृहस्थ जीवन में रहकर यह सिद्ध किया कि सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी मनुष्य परम आध्यात्मिक ज्ञान और शांति को प्राप्त कर सकता है। भगवान शंकर और माता पार्वती का परिवार, भगवान गणेश और कार्तिकेय सहित, समस्त संसार के लिए कर्तव्य-पालन और आदर्श जीवन का प्रतीक है।

आचार्य जोशी ने कहा कि शिव महापुराण यह संदेश देता है कि गृहस्थाश्रम में पूरी ईमानदारी, धर्म और श्रद्धा के साथ जीवन व्यतीत करने वाला मनुष्य भी सहज रूप से भगवान शिव की कृपा का पात्र बन सकता है।

उन्होंने तर्क और संस्कृति के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तर्क करने से संस्कृति को आघात नहीं पहुंचता, बल्कि सही दिशा मिलने पर संस्कृति और मजबूत होती है। आज के बच्चे जब हर बात पर सवाल करते हैं तो कई बार बड़ों को लगता है कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों का अनादर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आघात तब पहुंचता है, जब तर्क के साथ सम्मान समाप्त हो जाता है। यदि बच्चे सम्मानपूर्वक सवाल पूछें और बड़े धैर्यपूर्वक उनके प्रश्नों का उत्तर दें, तो पीढ़ियों के बीच का टकराव दूर किया जा सकता है।

कथा के दौरान मंदिर प्रांगण में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह धूमधाम से मनाया गया। शिव विवाह के अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

सप्तम दिवस की कथा के यजमान, देवेन्द्र अग्रवाल, विवेक शर्मा, शर्मिला भट्ट, विपिन चंद्र रमोला, मुकेश चंद्र रमोला, अनीता गुसाई, देवेशि नायक, नैन सिंह, अरुण सती, आशीष पुरोहित, लव मंडोली विवेक कपूर, रीता कपूर, मदन हुरला, अर्चना ठाकुर एवं सुदेश हुरला सहित अन्य शिवभक्त रहे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था गुलमोहर बर्त्वाल, आत्माराम शर्मा, शर्मिला भट्ट एवं अन्य शिवभक्तों के सहयोग से की गई।

इस अवसर पर मंदिर समिति के अध्यक्ष सीताराम भट्ट, देवेन्द्र अग्रवाल, दीपक शर्मा, मदन हुरला, आत्माराम शर्मा, जयप्रकाश बंसल, शरद शर्मा, प्रमोद शर्मा, सुनील कौशिक, संदीप कुमार, अर्चना ठाकुर, सुदेश हुरला, शर्मिला भट्ट, मंजू, अन्नू सहित मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से शिव महापुराण कथा का श्रवण किया और पुण्यार्जन प्राप्त किया।

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