23 साल पुराने जेनी प्रकरण में फिर उठा DNA टेस्ट का मुद्दा, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाकर न्याय की मांग
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण ने एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। असम से देहरादून पहुंची पीड़िता जेनी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने बेटे के डीएनए परीक्षण की मांग की है। जेनी का कहना है कि वह लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रही है और अब अपने बेटे को उसका अधिकार दिलाना चाहती है। उसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले की दोबारा जांच कराने की अपील की है।
‘मेरे बेटे को पिता का नाम और अधिकार चाहिए’
देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान जेनी ने आरोप लगाया कि जब वह महज 16 साल की थी, तब उसके साथ दुष्कर्म हुआ और वह गर्भवती हो गई थी। पीड़िता ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और अपने बेटे का डीएनए मिलान कराने की मांग करते हुए कहा कि वह अपने बेटे को उसके पिता का नाम और अधिकार दिलाना चाहती है। जेनी का आरोप है कि पहले जब उसने न्याय के लिए आवाज उठाई थी, तब प्रभावशाली लोगों ने उसे गुमराह किया और उसे वहां से जाने पर मजबूर कर दिया था।
23 साल पुराना मामला, पहले भी उठे थे राजनीतिक सवाल
जेनी प्रकरण करीब 23 साल पहले भी उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बना था। उस समय हरक सिंह रावत को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। पीड़िता का आरोप है कि उस दौर में राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले की जांच प्रभावित हुई और उसे न्याय नहीं मिल सका। अब इतने वर्षों बाद जेनी ने फिर से सामने आकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग उठाई है।

अंकिता भंडारी मामले से मिली दोबारा लड़ने की प्रेरणा
जेनी का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार में अपराध के मामलों पर की गई कार्रवाई और अंकिता भंडारी हत्याकांड में हुई कानूनी कार्रवाई को देखकर उसे दोबारा न्याय की उम्मीद जगी है। पीड़िता के मुताबिक, अंकिता मामले में आरोपियों के खिलाफ हुई कार्रवाई ने उसे अपने साथ हुए कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का हौसला दिया।
जेनी ने उत्तराखंड के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर पुराने मामले की दोबारा जांच कराने की मांग भी की है। उसने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए भरोसा जताया कि जिस तरह अंकिता भंडारी मामले में कार्रवाई हुई, उसी तरह उसे और उसके बेटे को भी न्याय मिल सकेगा।
कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी उठाए सवाल
इस मामले को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि महिला अधिकारों और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आवाज उठाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। हालांकि, इस संबंध में उनकी ओर से किसी प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं से समर्थन की उम्मीद

जेनी की इस लड़ाई के बीच अब महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी निगाहें हैं। खास तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना से पीड़िता को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल यह देखना होगा कि पुराने मामले की दोबारा जांच को लेकर पुलिस और शासन स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
23 साल बाद न्याय की मांग लेकर सामने आई जेनी ने अपने बेटे के डीएनए परीक्षण और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें रहेंगी।
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