फिर फूटा जेनी प्रकरण का बम, पीड़िता ने हरक पर लगाये गंभीर आरोप, कहा मेरे बेटे को पिता का नाम चाहिए

Nov 7, 2026 - 18:30
 138  3.2k
फिर फूटा जेनी प्रकरण का बम, पीड़िता ने हरक पर लगाये गंभीर आरोप, कहा  मेरे बेटे को पिता का नाम चाहिए

रैबार डेस्क: उत्तराखंड की राजनीति में 23 साल बाद फिर से दीवाली के मौके पर जेनी प्रकरण का बम फूटा है। 2003 में तत्कालीन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर यौन शोषण और अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाने वाली जेनी ने शनिवार को देहरादून में पत्रकार वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई।

जेनी ने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका ऐसा शोषण हुआ, जैसा शायद किसी अन्य महिला के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, जहां उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने के आसार हैं।

जेनी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस समय उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI के अधिकारी उनसे मिलने केवल एक बार अस्पताल आए थे। उस समय वह पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय उनकी परिस्थितियों और मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित अस्पताल के अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

पत्रकार वार्ता में जेनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे का जिक्र करते हुए कहा कि वह इतने वर्षों से पिता के नाम और पहचान के बिना जीवन बिता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसका नाम मिलना चाहिए। जेनी ने बेटे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इतने वर्षों से उनके बच्चे की पहचान को लेकर राजनीति होती रही, लेकिन किसी ने उसके भविष्य और अधिकारों की चिंता नहीं की।

उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप दोहराते हुए कहा कि उनके साथ हुए कथित शोषण के बाद उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्होंने जबरन हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप लगाते हुए पुराने घटनाक्रम की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। जेनी के इन नए बयानों पर अब हरक सिंह रावत का पक्ष और उनके दावों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे

क्या था जेनी प्रकरण
जेनी प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2002 के आखिर में हुई थी। असम की रहने वाली इंदिरा देवी उर्फ जेनी दिसंबर 2002 में देहरादून पहुंची थीं। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और डॉ. हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। जेनी ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और बाद में उन्हें सरकारी आवास में रखा गया। 15 जून 2003 को उन्होंने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताते हुए यौन शोषण का आरोप लगाया।

18 जून 2003 को यह मामला विधानसभा में गूंजा। विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विवाद बढ़ने के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया और कहा था कि जब तक वह बेदाग साबित नहीं होते, तब तक विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सीबीआइ जांच की संस्तुति की थी। सीबीआइ ने जांच के दौरान जेनी और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। 25 जुलाई 2003 को जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था।

जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूनों का परीक्षण कराया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के नमूनों का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद बच्चे का जैविक पिता होने के आरोप में हरक सिंह रावत को क्लीन चिट मिलने की जानकारी सार्वजनिक हुई। हरक सिंह रावत ने भी इस रिपोर्ट को अपनी बेगुनाही का आधार बताया था।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री धामी ने जेनी प्रकरण का जिक्र करते हुए इस मुद्दे को हवा दी थी, जिसके बाद हरक सिंह रावत सीएम धामी और महेंद्र भट्ट पर हमलावर हैं। अब जेनी के ताजा आरोपों से फिर एक बार सियासत गरमाने के असर हैं।

The post फिर फूटा जेनी प्रकरण का बम, पीड़िता ने हरक पर लगाये गंभीर आरोप, कहा मेरे बेटे को पिता का नाम चाहिए appeared first on Uttarakhand Raibar.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0