लहसुन और प्याज के अलावा दो एलियम प्रजातियां-Allium hookeri व Allium ampeloprasum-किसानों के लिए वरदान

Jun 23, 2026 - 00:30
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लहसुन और प्याज के अलावा दो एलियम प्रजातियां-Allium hookeri व Allium ampeloprasum-किसानों के लिए वरदान

Meerut CCSU News: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,मेरठ के वनस्पति विज्ञान विभाग में किए गए महत्वपूर्ण शोध में Allium hookeri तथा Allium ampeloprasum नामक दो दुर्लभ एलियम प्रजातियों में अनेक जैव सक्रिय (Bioactive) यौगिकों की उपस्थिति का पता चला है।
प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में शोध
शोध प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में शोधार्थी दीप्ति तेवतिया द्वारा किया गया। जिसके निष्कर्ष बताते हैं कि ये पौधे मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं और भविष्य में प्राकृतिक औषधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एलियम (Allium) औषधीय एवं खाद्य पौधों का वंश
एलियम (Allium) विश्व का एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय एवं खाद्य पौधों का वंश है। जिसमें वर्तमान में लगभग 1079 प्रजातियां सम्मिलित हैं। भारत में इसकी लगभग 40 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश हिमालयी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से वितरित हैं। लहसुन (Allium sativum) और प्याज (Allium cepa) इसी वंश के सर्वाधिक प्रसिद्ध सदस्य हैं, जबकि Allium hookeri तथा Allium ampeloprasum अपेक्षाकृत कम ज्ञात लेकिन औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियां हैं।
दोनों प्रजातियों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट गुण
अध्ययन में पाया गया कि इन दोनों प्रजातियों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, मधुमेहरोधी (Antidiabetic) तथा कैंसररोधी (Anticancer) गुण मौजूद हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इन पौधों में पाए जाने वाले जैव सक्रिय तत्व शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने, रोगजनक सूक्ष्मजीवों के नियंत्रण तथा विभिन्न रोगों की रोकथाम में सहायक हो सकते हैं। इसके साथ ही इनका उपयोग कार्यात्मक खाद्य पदार्थों (Functional Foods) एवं हर्बल उत्पादों के विकास में भी किया जा सकता है।
प्रतिरक्षा-वर्धक, सूजनरोधी तथा यकृत-संरक्षक गुणों की पुष्टि
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में Allium hookeri का उपयोग उत्तर-पूर्वी भारत, विशेषकर मणिपुर एवं मेघालय में सर्दी-जुकाम, खांसी, उच्च रक्तचाप, सूजन तथा पाचन संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता रहा है। वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके प्रतिरक्षा-वर्धक (Immunomodulatory), सूजनरोधी (Anti-inflammatory) तथा यकृत-संरक्षक (Hepatoprotective) गुणों की भी पुष्टि हुई है।
रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला पौधा
इसी प्रकार Allium ampeloprasum (जायंट लीक अथवा वाइल्ड लीक) का उपयोग पारंपरिक रूप से हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रक्तचाप नियंत्रण, संक्रमणों की रोकथाम तथा पाचन क्रिया को सुदृढ़ करने के लिए किया जाता है। इसमें उपस्थित सल्फर यौगिक, फ्लेवोनॉयड्स तथा फेनोलिक यौगिक इसे एक प्रभावी प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला पौधा बनाते हैं।
मणिपुर और कश्मीर में व्यावसायिक स्तर पर खेती
वर्तमान में Allium ampeloprasum तथा Allium hookeri की खेती उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, मणिपुर और कश्मीर में व्यावसायिक स्तर पर की जा रही है। शोध के दौरान यह भी देखा गया कि ये दोनों प्रजातियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जलवायु एवं मृदा परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक विकसित हो सकती हैं। इससे क्षेत्रीय किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है।
औषधीय फसलों की खेती से जोड़ सकता है
भारत में जहां लहसुन (Allium sativum) और प्याज (Allium cepa) का व्यापक उत्पादन होता है, वहीं इन नई एलियम प्रजातियों का अन्य राज्यों में विस्तार किसानों को औषधीय फसलों की खेती से जोड़ सकता है। इससे न केवल प्राकृतिक औषधियों की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकेगा। साथ ही कृषि विविधीकरण, पोषण सुरक्षा तथा औषधीय पौधों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। शोध कार्य दीप्ती तेवतिया, शोधार्थी, वनस्पति विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा प्रोफेसर विजय मलिक के निर्देशन में संपन्न किया गया। शोध के निष्कर्ष इन दोनों एलियम प्रजातियों को स्वास्थ्य संवर्धन, औषधीय अनुसंधान तथा कृषि विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में स्थापित करते हैं।

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